Roman Gods
क्या आप ने कभी सोचा है
फरवरी महीने मे केवल 28 दिन क्यों होते है?

दिसंबर का अर्थ दस होता है परंतु दिसंबर 12वा महीना क्यों है

यही सवाल कभी न कभी हम सभी के दिमाग में अवश्य आया होगा की आज हम जीन महीनो के नाम बचपन में याद करते थे उन अंगेजी महीनों के नाम की उत्पति कैसे हुई।
महीनों के यह नाम कैसे पड़े और किसने सबसे पहली इनका नामकरण किया।

हम सब को पता है की साल मे 12 महीने होते है लेकिन बहुत कम लोग जानते है की प्रारंभिक समय में रोमन कैलेंडर मे केवल 304 दिन और 10 माह होते थे और यही कलेंडर आज के कलेंडर का आधार है। जिनके नाम कुछ इस प्रकार थे-

» मार्टिअस (Martius) 31 दिन

» एप्रिलिस (Aprilis) 29 दिन

» मेअस (Maius) 31 दिन

» जूनिअस (Junius) 30 दिन

» क्विंटिलिस (Quintilis) 31 दिन

» सैक्सिटिलिस (Sextilis) 30 दिन

» सेप्टेम्बर (September) 30 दिन

» अक्टूबर (October) 31 दिन

» नवंबर (November) 31 दिन

» दिसंबर (December) 30 दिन

उस समय साल के आखिरी चार महीने - 7वा महिना सितम्बर, 8वा महिना अक्टूबर, 9वा महिना नवम्बर और 10वा महिना दिसम्बर हुआ करते थे। ईसा पूर्व पहली सदी मे न्यूमा पाम्पिलिअस नाम के राजा ने दिसम्बर के बाद जैनुअरिअस और फेब्रुअरिअस दो और महीने जोड़ कर वर्ष को 12 माह और 355 दिनों का कर दिया।
फेब्रुअरिअस साल का अंतिम महीना था इस लिए बाकी के बचे दिन उसमे जोड़ दिए गये और फरवरी महीने को 29-30 दिन और चौथे वर्ष 'लीप वर्ष' निश्चित कर दिया।

बाद में जनवरी और फरवरी को पहले एवं दूसरे महीने की मान्यता प्रदान की। फिर भी कैलेंडर पुरी तरह ठीक नहीं था कैलेंडर के अनुसार माह मौसम से दूर होते जा रहे थे।
उसके बाद जूलियस सीजर के प्रयास से वर्ष 365 दिन 6 घंटों का माना गया और सीजर ने कैलेंडर में महीनो के दिनों की संख्या को भी कुछ बदल दिया जैसे- जेनुअरी में 31 दिन, फेब्रुअरी 29-30, मार्टिअस 31, एप्रिलिस 30, माइअस 31, जूनिअस 30, क्विन्टिलिस 31, सेक्सटिलिस 30, सेप्टेम्बर 31, आक्टोबर 30, नवम्बर 31 और दिसम्बर 30 दिनों का रखा गया।

इसके पश्चात आगस्टस सीजर ने सेक्सटिलिस का नाम बदलकर अगस्टस कर दिया और साथ ही अगस्टस महीने के दिनों की संख्या 31 करा दी। जिसके कारण कुछ और भी महत्वपूर्ण परिवर्तन करने पड़े जैसे फेब्रुअरी में 29-30 के स्थान पर 28-29 दिन किया गया। और सेप्टेम्बर में 30, आक्टोबर में 31, नवम्बर 30, और दिसम्बर 31 दिन कर दिया गया। तब से यही क्रम चला आ रहा है।

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