दिल्ली !!
भारत के उत्तर में स्थित यमुना नदी के किनारे बसी दिल्ली भारत की राजधानी ही नहीं पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र भी है।
राजधानी होने के कारण भारतीय सरकार के कार्यालय जैसे संसद भवन, राष्ट्रपति भवन आदि अनेक आधुनिक स्थापत्य के नमूने तो यहाँ देखे जा सकते हैं।

प्राचीन नगर होने का कारण इसका इतिहास बहुत पुराना है। महाभारत में इसे पांडवों का राज्‍य इंद्रप्रस्‍थ कहा गया था। और इसने अनेक शासकों का शासन देखा है। खिलजी और तुगलक के बाद मुगलों ने इस पर राज किया और पुरानी दिल्‍ली को बसाया।
1803 में यह अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गई। 1911 में अंग्रेजों ने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया। 1947 में भारत की आजादी के बाद भी यह देश की राजधानी बनी रही। इसे विश्‍व के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है।

पुरातात्विक दृष्टि से दिल्‍ली में अनेक ऐतिहासिक इमारतें और किलें हैं जो भारतीय इतिहास की जीवंत निशानियां हैं। जैसे कुतुबमीनार, हुमायूँ का मकबरा, जंतर मंतर, लाल किला ऐतिहासिक राजसिक इमारत यहाँ है तो दूसरी ओर निज़ामुद्दीन औलिया की पारलौकिक दरगाह। लगभग सभी धर्मों के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल यहाँ हैं मंदिर, गुरुद्वारा, बहाई मंदिर और देश पर जान देने वालों का स्मारक भी दिल्ली शहर में निर्मित किया गया है। भारत के प्रधान मंत्रियों की समाधियाँ हैं,  साथ ही अनेक प्रकार के संग्रहालय और बाज़ार हैं जो दिल्ली घूमने आने वालों को बहुत ज्यादा पसंद हैं। इसे आकर्षित होकर प्रतिवर्ष लाखों सैलानी यहां आते हैं और यहां की मिश्रित संस्‍कृति को जानने की कोशिश करते हैं।

दिल्ली कें दर्शनीय स्थल

बिड़ला मंदिर (लक्ष्मी नारायण मंदिर) » इसका निर्माण 1938 में हुआ था और इसका उद्घघाटन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था। भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित यह मंदिर दिल्ली के प्रमुख मंदिरों में से एक है।

छतरपुर मंदिर » छतरपुर मंदिर गुंड़गांव - महरौली रोड पर स्थित है। यह मंदिर दिल्ली के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में एक है। मूल रूप से यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है। इसके अतिरिक्‍त यहां भगवान शिव, विष्णु, देवी लक्ष्मी, हनुमान, भगवान गणेश और राम आदि देवी - देवताओं के मंदिर भी हैं।

कमल मंदिर (लोटस टैंपल) » यह मंदिर एशिया में बना एकमात्र बहाई प्रार्थना केंद्र है। 26 एकड़ में फैले इस मंदिर का निर्माण 1980 से 1986 के बीच हुआ था। इसे बनाने में कुल 10 मिलियन रु. की लागत आई थी।

दिगंबर जैन मंदिर » दिल्‍ली का सबसे पुराना दिगंबर जैन मंदिर लाल किला के सामने स्थित है। इसका निर्माण 1526 में हुआ था। वर्तमान में इसकी इमारत लाल पत्‍थरों की बनी है।

गुरुद्वारा बंगला साहिब » गुरु हरि किशन सिक्खों के आठवें गुरु थे। यह गुरुद्वारा गुरु हरिकिशन साहिब को समर्पित है। प्रारंभ में गुरुद्वारा बंगला साहिब एक हवेली थी जहां गुरु हरि किशन 1664 में अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान रुके थे।

जामा मस्जिद » जामा मस्जिद भारत की सबसे बड़ी मस्जिद है। जो लाल किले से महज 500 मी. की दूरी पर स्थित है। इस का निर्माण 1650 में शाहजहां ने शुरु करवाया था। मस्जिद बनने में 6 वर्ष का समय और 10 लाख रु.लगे थे।

खिड़की मस्जिद » खिड़की मस्जिद का निर्माण फिरोज शाह तुगलक के प्रधान मंत्री खान-ई-जहान जुनैन शाह ने 1380 में करवाया था। इस के अंदर बनी खूबसूरत खिड़कियों के कारण इसका नाम खिड़की मस्जिद पड़ा।

कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद » इस मस्जिद का निर्माण गुलाम वंश के प्रथम शासक कुतुब-उद-दीन ऐबक ने 1192 में शुरु करवाया था। लेकिन बाद में अल्तमश ने 1230 में और अलाउद्दीन खिलजी ने 1351 में इसमें कुछ और हिस्से जोड़े।

फतेहपुरी मस्जिद » यह मस्जिद चांदनी चौक में स्थित है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां की पत्नी फतेहपुरी बेगम ने 1650 में करवाया था। लाल पत्थरों से बनी यह मस्जिद मुगल वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है। यह एक कुंड भी है जो सफेद संगमरमर से बना है।

लाल किला » लाल किले की नींव शाहजहां के शासन काल में पड़ी थी। इसे पूरा होने में 9 साल का समय लगा। किले पर स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत के प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और भाषण देते हैं।

हुमायूं का मकबरा » हुमायूँ का मकबरा लोधी रोड और मथुरा रोड के बीच पूर्वी निज़ामुद्दीन के इलाके में स्थित एक प्रमुख पर्यटक आकर्षण है और 1993 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में घोषित किया गया तथा भारत में मुगल स्थापत्य कला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है।

पुराना किला » इस किले का निर्माण शेर शाह सूरी ने 1538 से 1545 में करवाया था। इतिहासकारों के अनुसार इसी इमारत से गिरने की वजह से हुमायूं की मृत्यु हुई थी। यह किला केवल देशी-विदेशी पर्यटकों को ही आकर्षित नहीं करता बल्कि इतिहासकारों और पुरातत्ववेत्ताओं को भी लुभाता है।

जंतर मंतर » इसका निर्माण सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1724 में करवाया था। मोहम्मद शाह के शासन काल में हिन्दु और मुस्लिम खगोलशास्त्रियों में ग्रहों की स्थित को लेकिर बहस छिड़ गई थी। इसे खत्म करने के लिए सवाई जय सिंह ने जंतर-मंतर का निर्माण करवाया।

कुतुब मीनार » कुतुब मीनार का निर्माण कुतुब-उद-दीन ऐबक ने शुरु 1199 में शुरु करवाया था और इल्तुमिश ने 1368 में इसे पूरा कराया। इस इमारत का नाम ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी के नाम पर रखा गया। ऐसा माना जाता है कि इसका प्रयोग पास बनी मस्जिद की मीनार के रूप में होता था और यहां से अजान दी जाती थी।

इंडिया गेट » इंडिया गेट का निर्माण प्रथम विश्व युद्ध और अफगान युद्ध में मारे गए 90000 भारतीय सैनिकों की याद में बनाया गया था। इसकी नींव 1921 में ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी और इसे कुछ साल बाद तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था। अमर जवान ज्योति की स्थापना 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों की याद में की गई थी।

राजघाट » यमुना नदी के किनारे पर काले संगमरमर से बनी महात्मा गांधी की समाधि स्थित है। यह एक खूबसूरत है। यहां पास ही शांति वन में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की समाधि भी है।

गार्डन ऑफ फाइव सेंसिस »यह खूबसूरत और विशाल बाग 20 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इसके विकास का उद्देश्य एक ऐसी जगह का निर्माण करना था जहां लोग आराम से आकर बैठ सकें और सामाजिक गतिविधियों में भाग ले सकें।

लोदी गार्डन » लोदी गार्डन सफदरजंग के मकबरे से 1 किमी. पूर्व में स्थित है। लोदी गार्डन मूल रूप से गांव था जिसके आस-पास 15वीं-16वीं शताब्दी के सैय्यद और लोदी वंश के स्मारक थे। इस गार्डन में शीश गुंबद, मोहम्मद शाह का मकबरा और सिकंदर लोदी का मकबरा है।

मुगल गार्डन » मुगल गार्डन राष्ट्रपति भवन में स्थित देशी - विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। इसका डिजाइन सर एडविन लुटियंस ने लेडी हार्डिग के लिए बनाया था। 13 एकड़ में फैले इस गार्डन में मुगल और ब्रिटिश शैली का मिश्रण दिखाई देता है। मुगल गार्डन फरवरी में पर्यटकों के लिए खुलता है।

चिड़ियाघर » पुराने किले के पास स्थित यह चिड़ियाघर एशिया के सबसे अच्छे चिड़ियाघरों में एक है। 1959 में बने इस चिड़ियाघर का डिजाइन श्रीलंका के मेजर वाइनमेन और पश्चिम जर्मनी के कार्ल हेगलबेक ने बनाया था। 214 एकड़ में फैले इस जैविक उद्यान में जानवरों और पक्षियों की 22000 प्रजातियां और 200 प्रकार के पेड़ हैं।

क्राफ्ट म्यूजियम » यह संग्रहालय प्रगति मैदान में स्थित दिल्ली का प्रमुख पर्यटक स्थल है। देश के विभिन्‍न राज्‍यों की सांस्‍कृतिक झलक इस संग्रहालय देखी जा सकती है। इस संग्रहालय में देशभर से लाए गए दुर्लभ कला और हस्त शिल्प का विस्‍तृत संग्रह है।

राष्ट्रीय संग्रहालय » 1960 में निर्मित राष्ट्रीय संग्रहालय में भारतीय सभ्यता के विकास से संबंधित चीजों को प्रदर्शित किया गया है। यहां चोल काल के पत्थर और कांसे से बनी मूर्तियां रखी हुई हैं। इस राष्ट्रीय संग्रहालय में एक संरक्षण प्रयोगशाला है। इस प्रयोगशाला में अनेक कलाकृतियों को संभाल कर रखा जाता है और छात्रों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

भारतीय रेल संग्रहालय » दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित रल संग्रहालय भारतीय रेल के 140 साल के इतिहास को प्रस्तुत करता है। विभिन्न प्रकार के रेल इंजनों को देखने के लिए देश भर से पर्यटक यहां आते हैं। इसका निर्माण ब्रिटिश वास्तुकार एम जी सेटो ने 1957 में किया था।

डॉल म्‍यूजियम » यह संग्रहालय बहादुर शाह जफर मार्ग पर चिल्‍ड्रन बुक ट्रस्‍ट की बिल्डिंग में स्थित है। इस संग्रहालय की स्‍थापना मशहूर कार्टूनिस्‍ट के.शंकर पिल्‍लई ने की थी। डॉल म्‍यूजियम में 85 देशों की करीब 6500 गुडि़यों का संग्रह देखा जा सकता है।

चांदनी चौक » यह दिल्‍ली के थोक व्‍यापार का प्रमुख केंद्र है। पुराने समय में तुर्की, चीन और हॉलैंड के व्‍यापारी यहां व्‍यापार करने आते थे। यह मुगल काल में प्रमुख व्‍यवसायिक केंद्र था। इसका डिजाइन शाहजहां की पुत्री जहांआरा बेगम ने बनाया था। यहां की गलियां संकरी हैं।

कनॉट प्‍लेस » कनॉट प्‍लेस दिल्‍ली की प्रमुख मार्केट है। इसका नाम ब्रिटेन के शाही परिवार के सदस्‍य ड्यूक ऑफ कनॉट के नाम पर रखा गया था। इस का डिजाइन डब्‍ल्‍यू एच निकोल और टॉर रसेल ने बनाया था। अपनी स्‍थापना के 65 साल बाद भी यह दिल्‍ली में खरीदारी का प्रमुख केंद्र है। यहां के इनर सर्किल में लगभग सभी अंतर्राष्‍ट्रीय ब्रैंड के कपड़ों के शोरूम, रेस्‍टोरेंट और बार हैं।

जनपथ और पालिका बाजार » बंटवारे के बाद यहां आए शरणार्थियों और तिब्‍बती शरणार्थियों ने यहां अपनी दुकानें बनाकर इस मार्केट को बसाया। यहां आपको सस्‍ते कपड़े मिल जाएंगे लेकिन इसके लिए मोल भाव करना आना चाहिए। पालिका बाजार भूमिगत बाजार है। यहां करीब 400 दुकानें हैं जहां कम कीमत पर कपड़े और सामान मिल जाता है। लेकिन यहां भी बहुत मोल भाव करना पड़ता है।

दिल्‍ली हाट » यहां पर आकर संपूर्ण भारत के एक साथ दर्शन हो जाते हैं। यहां पर भारत के विभिन्‍न प्रांतों के हस्‍तशिल्‍प को प्रदर्शित करती दुकानें हैं। दक्षिण भारतीय व्‍यंजन से लेकर सुदूर उत्‍तर पूर्व के खाने के स्‍टॉल भी यहां मिल जाते हैं। यहां आप नृत्‍य और संगीत का भी आनंद उठा सकते हैं।

कैसे पहुंचे :

By Roadसड़क मार्ग » दिल्ली, राष्ट्रीय राजमार्ग 2 से बर्धमान, वाराणसी, इलाहबाद, कानपुर और आगरा के रास्ते कोलकता से जुड़ी है, राष्ट्रीय राजमार्ग 8 से सूरत, अहमदाबाद, उदयपुर, अजमेर और जयपुर के रास्ते मुंबई से जुड़ी है, राष्ट्रीय राजमार्ग 1 से जालंधर, लुधियाना और अंबाला होते हुए अमृत्सर और राष्ट्रीय राजमार्ग 24 से रामपुर और मुरादाबाद के रास्ते लखनऊ से जुड़ी है।

Flightहवाई मार्ग » इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा देश के लगभग सभी हवाई अड्डों से जुड़ा है। विदेशों से भी फ्लाइट्स यहां आती हैं।

Trainरेलामार्ग » दिल्ली में पुरानी दिल्ली, नई दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन, सराय रोहिल्ला और दिल्ली छावनी स्टेशन हैं जो दिल्ली को अन्य शहरों से जोड़ते हैं।

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